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इन वारो में बनाएंगे संबंध, तो पैदा होगी बिगड़ैल संतान









 गर्भ धारण की जानकारी

“कृपया इस लेख को पूरा पढ़े “



उपर लिखी लाइन को पढ़ कर थोड़ी शर्म महसूस होगी. लेकिन मैं कई वर्षो से यह सोच रहा हूँ की लगातार पैदा होने वाली पीढ़ी में उद्दंड और मानव प्रकर्ति की खिलाफ जाने वाले बच्चे पैदा हो रहे हैं.क्या कारन हैं.क्यों ऐसा हो रहा,की आज हमारी परम्परा और संस्कार गिरते जा रहे हैं .क्यों आज चारो तरफ नंगापन दिख रहा हैं क्या कारण  हैं की गंदे विचरो को बच्चे जल्दी पकड़ते हैं और अच्छे विचारो को पकड़ने वाले कम,क्या कारण हैं की लगातार भारत की प्रकर्ति गिरते जा रही हैं .आज तो भारत ही नहीं विश्व भी इस आचरण और नंगेपन के गिरते ग्राफ से परेशान हैं. आज बड़े बुजुर्ग की कोई अहमियत नहीं हैं,बड़ो के सन्मान और मर्यादा की धजिया उड़ रही हैं.
  आप आये दिन देखते भी हैं और पेपर में भी पढ़ते हैं की लड़की औरत को मर्द जाति ने सिर्फ भोग का सामान मान लिया हैं और औरत वर्ग भी काफी हद तक सहमत होते जा रही हैं अर्थात जो भी औरत और लड़की मिले उसको उन्हें भोगना हैं अर्थात भोगवादी प्रकर्ति से उपर कुछ दीखता ही नहीं हैं.क्या मानव को सिर्फ भोग करने के लिए जमीन पर भेजा हैं .क्या मानव जानवर हैं.अर्थात सभी प्रशनो को सोचे तो शायद समय कम पड़ जायेगा लेकिन आज का विषय ही ऊपर लिखी बातो से तालुकात रखता हैं .

वेदों में हर प्रशन का उत्तर हैं लेकिन हम इतने गिर गये की हमें वेद पढने का टाइम ही नही मिलता.मतलब चुगली करने और फ़ालतू बेठने का समय हैं लेकिन वेदों को पढने और वेदों में पड़ी जानकारी से जीवन को जीने का जो मजा हैं वो कुछ अलग ही हैं.
मेरे मन और दिल में एक प्रश्न कई सालो से चल रहा था की यह पीढ़ी इतनी गिर क्यों रही हैं और इसको अगर उठाना और विकसित करना हैं तो क्या करे.आखिर मुझे उसका जवाब वेद में मिला मैं वेदों का ज्ञाता तो नहीं हूँ.लेकिन अपने जीवन को सुचारू चलाने का प्रयत्न करता हूँ.ऐसा नहीं की में भगवान् हूँ या कोई सिद्ध पुरुष हूँ मैं तो एक विद्यार्थी हूँ जो अपनी जिज्ञाषा के अनुरूप पढने के कोशिश कर रहा हूँ .
अगर हमें कुछ सुधरना हैं तो नर्सरी को सुधरना होगा,मतलब अगर हम कोई बगीचा लगते हैं तो पहले खेत और बगीचे की जगह की त्यार्री करते हैं फिर उसमे बीज बोते हैं और उसको हर तरह के नुकशान से बचाते हैं,ठीक उसी प्रकार हमें भी अपने बच्चो को जन्म देने से पहले सोचना होगा,अन्यथा हमारी धरती उजड़ने की और अग्रसर हैं.

मैंने और आपने महाभारत पढ़ी और देखी होगी,क्या कभी आपने यह सुना हैं की अभिमन्यु जब माँ के पेट में था तब अर्जुन ने अपनी पत्नी को चक्रव्यू में घुसने का कहानी सुना रहे थे लेकिन जब चक्रव्यू से बहार निकलने का समय और कहानी आयी तब अर्जुन की पत्नी अर्थात अभिमन्यु की माँ को नींद आ गयी थी और माँ की नींद का नतीजा यह निकला की अभिमन्यु चक्रव्यू में घुस तो गया लेकिन निकलने के कहानी का जब समय आया तो माँ को नींद आगये और अभिमन्यु मारा गया.
अर्थात माँ का गर्भ किसी भी बच्चे के विकास और पतन का जिमेवार हैं,अर्थात माँ का गर्भ हे इस प्रक्रति के लाज और संस्कार को बच्चाने का एक रास्ता हैं.अर्थात अगर गर्भ संस्कार और गर्भ धारण की विधि सही और समय अनुकूल हो तो आज भी राम,रहीम,मोहमद,ईसा जैसे महापुरुष पैदा हो सकते हैं.

मैंने जो ऊपर लिखा हैं की गर्भ धारण का भी अपना समय और वार के साथ सही समय होता हैं.अक्षर हम इस प्रकार की बात जब भी करते हैं तो हमें शर्म आती हैं लेकिन हम यह क्यों नहीं सोचते की जब डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो हमारे शारीर से जुडी हर बात पूछता हैं तो उस समय तो हम डॉक्टर को गन्दा नहीं बोलते.


मतलब अगर हमारा इरादा सही हो मानव कल्याण करी हो और दुनिया से ऊपर मानव के सुधार वाला हो तो क्या शर्म करनी चाहिए.मेरे हिसाब से तो नहीं करनी चाहिए,
मेरा मानना हैं की अब वो समय आगया हैं जब वेदों के मुताबिक जीवन चले और प्रकर्ति का विनाश नहीं हो उस पर बल देना चाहिये.
वेदों में लिखा हैं की बच्चे का विकास माँ गर्भ के पहले दिन अर्थात माता पिता के मिलन गर्भ धारण से ही हूँ जाता हैं .जिस दिन माँ के गर्भ में पिता का अंश स्थापित होता हैं उस घडी और पल से ही बच्चे के जीवन का सफ़र शुरू हो जाता हैं.अर्थात जिस दिन माँ के गर्भ में पिता का अंश स्थापित होता हैं उस दिन और वार,वेला,पल,नक्षत्रका बच्चे के जीवन पर 100% प्रभाव पड़ेगा यह वेदों में लिखित हैं.


आज वेदों में लिखी उसी जानकारी और प्रकृति के विनाश से बचने के लिए कुछ बाते आपके सामने रखता हूँ.
गर्भ धारण की वेला और वार को  वेदों में बड़ी तव्जो दी गयी हैं.
वेदों में कुछ वार गर्भ धारण के लिए सही हैं और कुछ वार गर्भ धारण के लिए सही नहीं हैं.
अगर की दम्पति को संतान प्राप्ति की इच्छा हैं तो वेदों के अनुसार निम्न वारो का ध्यान रखना जरुरी हैं.
मानव जीवन एवं हिन्दू शास्त्र
गर्भ उपनिषद में स्त्री-पुरुष के संबंध बनाने से लेकर किस प्रकार से मां के गर्भ में शिशु का जन्म होता है, कैसे वह समय के साथ विकसित होता है और गर्भ के भीतर 9 महीने तक वह क्या सोचता है, इसके बारे में बताया गया है।
जन्म मृत्यु का रहस्य
इतना ही नहीं, इस महान ग्रंथ में यह तक बताया गया है कि किस प्रकार से एक किन्नर की उत्पत्ति होती है। किन हालातों में मां के गर्भ से एक किन्नर का जन्म होता है, इस बात के रहस्य को गर्भ उपनिषद में उजागर किया गया है।
इन वारो को गर्भ धारण नहीं करना चाहिए.

मंगलवार


इस दिन का स्वामी होता है मंगल, अत्यंत क्रोधी एवं विनाशकारी ग्रह माना जाता है मंगल। इसलिए शास्त्रों के अनुसार इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती हैगर्भ संस्कार के अनुसार यह दिन गर्भधारण के लिए बेहद अशुभ है। यदि इस दिन स्त्री गर्भधारण कर ले, तो होने वाली संतान बेहद क्रोधी और घमंडी होती है। किसी की बात ना सुनना, केवल अपने मन मुताबिक कार्य करना, सभी को परेशान करना और स्वभाव में ही हिंसा का होना, ऐसे होते हैं मंगल ग्रह के प्रभाव में जन्मे बच्चे
मंगलवार को किसी भी दम्पति को संतान प्राप्ति का प्रयास या प्लानिंग नहीं करनी चाहिए. मंगलवार एक गर्म वार हैं और मंगल को क्रूर ग्रह कहा गया हैं,अगर आप मंगलवार को संतान प्राप्ति की प्लानिंग बना रहे हैं तो आपका बच्चा और आपका जीवन नरक बनने से कोई नहीं रोक सकता हैं.मंगलवार की तरह आपका बच्चा गर्म मिजाज का होगा और एक दम जल्दी भड़कने वाला होगा अर्थात एक डाकू या फिर कह सकते हैं की किसी की नहीं सुनने वाला बच्चा पैदा होगा.

 शनिवार :


यह दिन शनि ग्रह को समर्पित होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार क्रूर एवं पापी ग्रह की श्रेणी में आता है शनि ग्रह। इसलिए इस दिन पति-पत्नी का संतान उत्पत्ति के विचार से करीब आना अशुभ माना जाता है।
शनि ग्रह के प्रभाव से होने वाली संतान निराशावादी एवं नकारात्मक सोच वाली होती है। शनि ग्रह कई बार ऐसे बच्चों को ताउम्र रोग भी प्रदान करता है।
अगर आप शनिवार को बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके बच्चे के लिए बहुत ख़राब होगा यह 100% लागु होगा.शनिवार सभी ग्रहों में धिरे और एकान्त्वादी होता हैं.अर्थात आपका बच्चा किसी के साथ नहीं चल पायेगा और किसी के साथ नहीं बनेगी.ऐसा बच्चा निराशावादी और अपने आप में ही रहता हैं.कारन शनि कभी भी जल्दी और तड़क भड़क पर विश्वास नहीं करता.मतलब आप एक निराशावादी बच्चे को जन्म देने जा रहे हो.जिसका खामियाजा आपको बाद मे  उठाना पड़ेगा.

रविवार अर्थात सन्डे



ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रह को सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। यदि रविवार के दिन सूर्य देव की मन से पूजा की जाए तो व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण होती है। लेकिन फिर इस दिन को रतिक्रिया के लिए अशुभ क्यों माना जाता है?
रविवार का मालिक सूर्य हैं मतलब सूर्य सबसे शक्तिशाली तो हैं लेकिन सूर्य देव की उपासना अच्छी हैं लेकिन शारीरिक सम्बन्ध बनाना सूर्य देव की नजर में पवित्रता नहीं माना गया हैं. सूर्य को भी अत्यंत  गर्म प्रकर्ति का ग्रह माना गया हैं. अगर आपका बच्चा धरती पर सबसे शक्तिशाली भी होगा तो भी उसको और आपको कही आराम नहीं मतलब वो खुद भी जलेगा और आपको भी जलाएगा.रविवार अर्थात सूर्य पुत्र करण जो की महाभारत में होता हैं अगर आपने महाभारत देखि हैं तो आपने करण का जीवन और अंत देखा होगा.अर्थात रविवार को अगर आप बच्चे के प्लानिंग कर रहे हैं तो सावधान.

गर्भ धारण के लिए सही वार 


  
सोमवार,बुधवार,गुरूवार,और शुक्रवार वो वार हैं जिसमे जन्म लेने पर आपका बच्चा दुनिया की सभी सुख सुविधा और ऐश मौज से जीवन व्यतीत करेगा. क्यों की यह चारो वार ठंडी प्रकर्ति के हैं अर्थात अगर आप इन दिनों में बच्चे की प्लानिग करते हैं तो वेदों में बताये अनुशार शतप्रतिशत आपका बच्चा जीवन बहार आपके कहने अनुशार और आपके नितिनियामो को मानाने वाला और सुख पूर्वक जीवन जीने वाला होगा.



ऊपर लिखे चारो वार दुनिया में रहने के और सुख देखने के लिए जरुरी हैं.अर्थात अगर आप वास्तव में एक अच्छी संतान चाहते हैं तो गर्भ धारण की वेदों में दी हुई मन्यता को माने.

विशेष : दिनों का हिसाब जानें

लेकिन हिन्दू शास्त्रों के अनुसार दिन की शुरुआत किस समय होती है, क्या आप जानते हैं? अंग्रेजी समय के अनुसार नया दिन आधी रात 12 बजे के बाद आरंभ हो जाता है, लेकिन हिन्दू शास्त्रों के अनुसार नया दिन सूर्योदय पश्चात आरंभ होता तथा ब्रह्म बेला तृतीय पहर के पश्चात होता है।

तो यदि आप सोच लें कि मंगलवार का दिन आधी रात 12 बजे समाप्त हो गया है और इसके बाद गर्भधारण करना उचित होगा, तो यह गलत है। हिन्दू शास्त्रों द्वारा बताया गया समय का यह नियम हमेशा याद रखना चाहिए।
भारत में और वेदों में रात के १२ बजे के बाद दिन नहीं बदलता हैं.अर्थात ऐसा मत सोचना की चलो १२ बजे के बाद तो दूसरा वार लग जायेगा,तो आप गलत हैं.क्यों की भारत में वेदों के अनुसार वार सूर्य उदय के बाद बदलता हैं मतलब अगर आप बच्चे की  प्लानिंग मंगलवार को कर रहे हो तो आपको यह नहीं सोचना हैं की १२ बजे के बाद तो तारीख और वार बदल गया हैं.नहीं वेदों के अनुशार दिन और तारीख सूर्य उदय के बाद बदलेगी अर्थात सूर्य उदय से लेकर अगले सूर्य उदय तक भारत में वेदों के अनुसार पूरा एक दिन हैं.अर्थात आपको अगर बच्चे की प्लानिंग करनी हैं तो बुधवार,सोमवार,गुरूवार और शुक्रवार का दिन और रात ही हो.दिन में गर्भ धारण भी गलत हैं अर्थात इन वारो में रात का पहला पहर देव समय होता हैं .अर्थात  रात १२ बजे से पहले.
ध्यान : हर युवक और युवती जो शादी शुदा हैं,इस लेख पर जरुर गौर करे. इस प्रक्रति में वही    उगेगा जो हम उगायेगे,वही काटेंगे जो बोयेंगे.
सोचिय : अब किस प्रकार की प्रकर्ति का बच्चे को जन्म देना हैं वो आप पर निर्भर हैं .
मिशन : मैं इस मिशन को बिना किसी शर्म के एक पवित्र आत्मा के जन्म के लिए घर घर पहुचना चाहता हूँ. ज्ञान को देने में शर्म नहीं होती . अगर ज्ञान देने में शर्म करेंगे तो सबकुछ नष्ट हो जायेगा.

मुझे यह लिखते समय कोई शर्म नही आ रही हैं क्यों की मुझे प्रकति के विनाश,परम्पराओ और संस्कारो  को बचाना हैं.

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